चॉद फिर निकला , मगर तुम न आये ।
जला फिर मेरा दिल , करू क्या मै हाये ।।
चॉद फिर
निकला , मगर तुम न आये ।
जला फिर
मेरा दिल , करू क्या मै हाये ।।
ये रात कहती है ,वो दिन गये तेरे ।
ये जानता है दिल ,कि तुम नही मेरे ।।
खडी हूं मै फिर भी , निगाहें बिछायें ।
चॉद फिर निकला , मगर
तुम न आये ।
जला फिर मेरा दिल , करू क्या मै हाये ।।
सुलगते
सीने से धुंआ सा उठता है ।
लौट
चले,आओं कि दम धुटता है ।।
जला गये तन
को बहारों के साये ।
चॉद फिर निकला , मगर
तुम न आये ।
जला फिर मेरा दिल , करू क्या मै हाये ।।
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