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-: अब तो फि़जांओं में :-कृष्णभूषण सिंह चंदेल सागर

   -: अब तो फि़जांओं में :-
अब तो फ़‍िज़ओं में, वो मस्तीयॉ कहॉ ।
जहॉ देखो, बिरानी ही बिरानी छॉई है ॥
हुंस्न के चहरे ब़ेंजान से हो गये ।
हर जव़ा दिलों पर उदासी, सी छॉई है ।
कॉफूर हो चला, खुशीयों का आलम ।
हर जज़बादों में, बिमारी सी छॉई है ।।
     मैंख़ानों में रोज, मेले लगते 
   इब़ाद्दगाहों में, खांमोंशी सी छॉई हैं ।।
     अब तो फ़‍िज़ओं में, वो मस्तीयॉ कहॉ ।
     जहॉ देखो, बिरानी ही बिरानी छॉई है ॥
मदरसों में, अब ताल़ीम नही ,
हर ज़ज़बादों, हर जुबानों में ।
अब सियासी,  चालें छॉई है ॥
नफ़रत सी हो चली है दुनिया से ,
हर श़क्‍स के, चहरों पर खुदगजीं सी छॉई है ॥
बदलते वक्त ऐ आलम, का मिजाज तो देखों ।
इंसान की क्या,?
कुदरत ने भी, रंग बदलने की कसम सी खाई है ॥
अब तों फि़जओं में, वो मस्तीयॉ कहॉ ।
जहॉ देखों बिरानी ही बिरानी छॉई है ॥
बुर्जुगों से भी अब कायदा नही ।
ज़ाम से ज़ाम टकराने, 
की तहजीब सी आई है ॥
किसे कहते हों, तुम इसान यहॉ ?
यहॉ तो कपडों की तरह ,
 बदलते रिस्तों की बॉढ सीं आई है ॥
हम अपनी ही पहचान भूल गये
गली कूचों से घरों तक,
अब नंगी तसवीरें छांई हैं ।
दूंसरों की तहजीब को गले लगाते
उन पर बरबादींयों, की शांमत आई है
अब तो फि़जओ मे, वो मस्तीयॉ कहॉ ।
जहॉ देखो, बिरानी ही बिरानी छॉई है    बेटियों को जन्‍म लेने से पहले मारते ।
     बहुओं को दहेज के लिये जलाते ।।
  घर की लक्ष्‍मी को पराया धन कहते ।  
 उन पर बरबादियों की शामत सी आई है ।।
अब तो फि़जओ मे, वो मस्तीयॉ कहॉ ।
जहॉ देखो, बिरानी ही बिरानी छॉई है ।।


          कृष्णभूषण सिंह चंदेल सागर
            मो0 - 9926436304
                    krishnsinghchandel@gmail.com


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