बुन्देली दोहे
ज्ञानी मारे ज्ञान से तो रोम रोम झड जाये ।
मुंरख मारे डेढपा , तो फूंट खपरियां जाये ।।
अधा धुन्द के राज मे भैया ,
गधा पंजीरी खाये रे ।
अंधरा से अंधरा ने कईयो ,
तुरतई पड है टूट रे ।
धीरे धीरे पूछ ले भैया ,
कैसे गयी थी फूंट रे ।।
लम्बा तिलक मीठी वाणी
ये देखों दगाबांज की निशानी
राम ने मारे काऊ को ,राम ने पापी होये ।
आपई से मर जात है ,करके खोटे काम ।।
भीडतंत्र का जमाना है और बहुत का राज है
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