सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नि:शुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा परामर्श हेतु हमारे ईमेल पर संपर्क करें


नि:शुल्क होम्योपैथिक चिकित्सा परामर्श हेतु हमारे ईमेल पर संपर्क करें
       --------------------------------------------------------------

  आज के इस चिकित्सा के व्यवसायीकरण के कारण निर्धन, गरीब परिवार एवं सामान्य वर्ग आधुनिक चिकित्सा की पहुंच से दूर होता जा रहा है एवं अपना उपचार कराने के लिए उसके पास कोई इतना पैसा नही होता कि वह इन बडे बडे अस्‍पतालों का खर्च उठा सके । । ऐसे में हमारी संस्था द्वारा यह प्रयास किया गया है कि, हम ऐसे जरूरतमंद रोगीयों  की सहायता नि:शुल्क ईमेल पर उन्हें उपलब्ध कराये । हमारी संस्था द्वारा बीमारी के लक्षण  होम्योपैथिक  सिद्धांत के अनुसार  चयन कर  परामर्श भेजा जाता है, जिससे वह घर बैठे  हमारी दवाओं का सेवन कर  इसका लाभ उठा सकते हैं । ऐसे व्यक्ति बिना किसी संकोच के हमारे ईमेल पर अपने रोग लक्षण लिखकर, हम से नि:शुल्क परामर्श प्राप्त कर सकते हैं । यह हमारे ब्लॉगर साइट पर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।.  M.9926436304
हमारा ईमेल krishnsinghchandel@gmail.com
             jjsociety1@gmail.com
हमारी साईड- http://krishnsinghchandel.blogspot.in
             https://jjehsociety.blogspot.com   

                                   अध्‍यक्ष
        डॉ0 सत्‍यम सिंह चन्‍देल बी.एच.एम.एस.एम.डी.
जन जागरण धर्माथ नि:शुल्‍क चिकित्‍सालय
  बण्‍डा रोड हीरो शो रूम के पास नर्मदाबाई स्‍कूल
                मकरोनिया सागर म0प्र0  
  सुबह 11-00 बजे से 4-00 दोपहर तक


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दद्दा बऊ की सुने ने भईया साकें (शौक) को मरे जा रये ।

 दद्दा बऊ की सुने ने भईया, साकें (शौक) को मरे जा रये । अँगुरियों में सिगरट दबाये , और मों (मुँह) में गुटका खाँ रये । निपकत सो पेंट पेर रये , सबरई निकरत जा रये । दद्दा बऊ की सुने ने भईया, साकें (शौक) को मरे जा रये । फटो सो पतलून पेर रये , अंग अंग दिखा रये । अच्छी बात करो तो भईया, हमई को आँखें दिखा रये । दद्दा बऊ की सुने ने भईया साकें (शौक) को मरे जा रये । खब्बीसा सी कटिंग कराये , जोंकरों सी सकल बना रये । लुगईयों से बाल रखायें,  कानों में बाली पेर रये  बाई चारी जींस और स्कीन टच उन्ना पेर रई लाज शर्म तो बची नईया, सडकों पे गर्रा रई । ऐसे ऐसे गाना चले हे , समक्षई मे नई आ रये । दद्दा बऊ की सुने ने भईया साकें (शौक) को मरे जा रये । कृष्णभूषण सिंह चन्देल M.9926436304

राजयोग (कहानी) डॉ0कृष्‍ण भूषण सिंह चन्‍देल

                                                                                                                    राजयोग         निष्‍ठुर नियति के क्रूर विधान ने राधेरानी के हॅसते खेलते वार्धक्‍य जीवन में ऐसा विष घोला की बेचारी , इस भरी दुनिया में अपने इकलौते निकम्‍मे पुत्र के साथ अकेली रह गयी थी , राधेरानी की ऑखों में पुत्र के प्रति स्‍नेह था , परन्‍तु नौकरी छोड कर आने की नाराजगी भी थी । स्‍वर्गीय पति के जीवन काल की एक एक घटनायें किसी चलचित्र की भॉति मानस पटल पर घूमने लगी , मंत्री जी तो मंत्री जी थे ,   राजसी ठाट बाट के धनी ,   उच्‍च राजपूत कूलीन धनाढ्य , परिवार में जन्‍मे ...

कलाकार -लधु कथा-

                                कलाकार        उस मायवी कलाकर के सुदृण सधें हाथों ने बेज़ान मिट्टी की मूर्तियों में जैसे जान फू़क दी थी ,ऐसा लगता था कि बेजान मूर्तियॉ चंद क्षणों में बोल उठेगी , कलाकार की इस अद्वितिय कलाकृतियों में एक कलाकृति ऐसी अनिंद्य सुन्‍दर यौवना की थी , जो शायद विधाता के संजीव रचना की कमियों को भी पूरी कर अपने अनुपम रूप लावण्‍य से इतरा कर मानों कह रही हो, देखों मै बेज़ान मिटटी की मूर्ति हूं , परन्‍तु तुम जीवित सुन्‍दरियों से भी अधिक सुन्‍दर हूं , देखो मेरे रूप लावण्‍य को , देखों मेरी देह आकृति के उतार चढावों को मुक्षमें कमी कहॉ है ?   सचमुच मिट्टी की आदमकद इस रूपसी के यौवन के देह आकृति को देख खजुराहों व कोर्णाक की सहज याद हो आती थी । गहरी झींल सी ऑखें मस्‍ती भरी देह आकार पुष्‍ट नितम्‍ब ,उन्‍नत स्‍वस्‍थ्‍य उरोज ,मिट्टी से बने अधोवस्‍त्रों की व्‍याख्‍या करने का दु:साहस शायद मुक...