गोविंद भैया सो पी बे बारों , अब कोनऊ नई, दिखा रओं । ने शेर सो दहाड बे बारो , प्रदीप कियांऊ दिखा रये । गर्ग भैया सो भग बे बारों, अब कोनऊ नई आ रऔं । पाठक जी तो बिलकुलई चिमा गये । जाटव सो दिखातई नईया, ने गोविंद की आँखें फोडबें बारों, वर्मा कियांऊ दिखा रऔं । सरकारी गाडी उल्टाबें बारो , मिश्रा तो अब दिखातई नईया । धुरा बारें महराज ,भूले भटके आ रये । महिला प्रेमी बेनी भाई साहब , घरई में घर वाली की खोपडी खा रये । कुवरमन के खाना को डब्बा , अब संगे नई जा रऔं , कुंवर सहाब को गोस माँस , बनाबे बारों कोनऊँ नई दिखा रऔं, पशु विभाग में अब बा रोनक बची नईयाँ । सबरे निपटत जा रयें गर्राबें बारें अब बचे नईयाँ, एक शशीकांत सो दिखा रऔं । नेतागिरी करबें बारे, पाण्डेय, पटेल से ,अब नई आ रये । कन्छेदी सो चौकीदार अब ढूँढे नई मिल रऔं के एस चन्देल
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें