आओं हम सब मिल कर
आओं हम सब मिल कर ,
एक नया हिन्दुस्तान बनायें ।
जहाँ मज़हपों के नाम नफरतें न हो ।
जात पात ऊँच नीच की दीवारें न हों ।
मंदिर मे शंख नाद , मस्जिद में आजान हो,
गुरुद्वारें गुरुवाणी ,चर्चों में घंटों की अवाज हो,
आओं हम सब मिल कर ,
एक नया हिन्दूस्तान बनाये,
मज़हपों के नाम पर, जों नफ़रते फैलाते ।
बन हम हिन्द की ताकत,
सबको अमन चैन का पाठ पढ पढायें,
आओं हम सब मिल कर ,
एक नया हिन्दुस्तान बनायें।
जहाँ राम हो , रहीम हो ,सिख हों , ईसाई हो ,
भाई से भाई चारा हो ,
जहाँ नफरतों की कोई जगह न हो ।
आओं हम सब मिल कर ,
एक नया हिन्दुस्तान बनायें ,
तोड दो उन दिवारों को ,
जहाँ से नफ़रत की बूँ आये ।
चैन अमन की खुशबू हो जहाँ ,
हम ऐसा एक मुल्क बनायें ।
दुनिया की जंगी,नफरती अबो़ं हवा से दूर,
एक सुनहरा, भारत बनायें ,
आओं हम सब मिल कर ,
एक नया हिन्दुस्तान बनायें ।
डाँ. कृष्णभूषण सिह चन्देल
मो. 9926436304
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