कृष्ण - बरस
बरस को, आज पावनी,आयो है त्यौहार ।
हमे खेलन दे फॉग गुलाल ।।
रंगी री धरती,
रंगो आकाश, रंगो आज सारो संसार ।
हमे खेलन दे फॉग गुलाल ।।
राधा- हम न खेलब , होरी हो तुम संग ,
ऐ गिरधर गोपाल, हमका जाये दे रे नन्द
लाल ।
कृष्ण -काहे रिसानी ओ राधे रानी ,
बरस बरस को त्यौहार ,
खेलों हमसे फाग गुलाल ।
राधा- पतली चुनरीयॉ, मोरी बाली उमरियाँ
तोहें ,काहे लाज शरम न आये ,
हमका जाये दे रे नन्द लाल ।
कृष्ण – लाज की मारी, ओ राधे रानी,
आज नही कछु लाज ।
हमका खेले दे फाग गुलाल ।
देखो कैसो मगन भयो है ,
आज
सारो संसार ,
क्षूम क्षूम के नाचे बावरी ,
ब्रज के
सारे नन्द गोपाल ,
बरस बरस को आज पावनी, आयो है त्यौहार ।
हमे खेलन दे फॉग गुलाल ।।
राधा- मोरी बाली उम पे,
तोहे तरस न आवें ,
ओ रसिया बेईमान ।
होरी के बहाने छेडे मोहे ,
तोरी नियत है खराब ,
मै न खेलू होरी तोरे संग,
हमका जाये दे रे नन्दलाल ।
कृष्ण – मै न छोडु हाथ
पावनी ,
देखो रंग को करो न अपमान ,
हमे खेले दे फाग गुलाल ।
बरस बरस को , आज पावनी,
आयो है त्यौहार ।
हमे खेलन दे फॉग गुलाल ।।
राधा-- मैना खेलू होरी तुम संग,
ऐ गिरधर गोपाल ,
मोहे जाये दे रे नन्द लाल ।
कृष्ण – कैसे न खेले होरी
हो राधे ,
आई है, फागून त्यौहार ,
राधा-- न मारों ,पिचकारी सावरे ,
न चुनरी भिगोओ, कछु लाज शर्म तो खाओं ।
कृष्ण – लाज की मारी,
ऐ राधे रानी,
आज कछु नही लाज
हमे खेलन दे रंग गुलाल ।
डाँ. कृष्णभूषण सिंह चन्देल
मो. 9926436304
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