तुम बनों राम,तो मै रावण बन जाता हूँ ।
तुम मर्यादा का पाठ पठाओं ,
माता के कहने पर , वनवास चले जाओं
भरत सा भाई तुम्हारा हो ,
भाई की खडाऊं को गद्दी मे रख ,
जो स्वयम सेवक जो कहलाता है ।
तुम बनो रामपाल,तो मै रावण बन जाता हूँ ।
मृत्युलोक में ,भगवान ने लीला रचाने ,
लिया जब राम आवतार , राम का दुश्मन बनने
कोई नही था तैयार , तब उस दशानन ज्ञानी ध्यानी ने ,
खलनायक का आमंत्रण स्वीकार किया ,
राम के हाथों ,मरने का स्वभाग्य स्वीकार किया ,
रावण जैसा महाज्ञानी क्या ये नही जानता था
तीनो लोकों के स्वामी से युद्ध जीत नही सकता ,
प्रभु हाथों से मृत्यु मिले , यही कामना थी उसकी ,
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