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गोविंद भैया सो पी बे बारों ,


 गोविंद भैया सो पी बे बारों ,

अब कोनऊ नई, दिखा रओं ।

ने शेर सो दहाड बे बारो ,

प्रदीप कियांऊ दिखा रये ।

गर्ग भैया सो भग बे बारों,

अब कोनऊ नई आ रऔं ।

पाठक जी तो बिलकुलई चिमा गये ।

जाटव सो दिखातई नईया,

ने गोविंद की आँखें फोडबें बारों,

वर्मा कियांऊ दिखा रऔं ।

सरकारी गाडी  उल्टाबें बारो ,

मिश्रा  तो अब दिखातई नईया ।

धुरा बारें महराज ,भूले भटके आ रये ।

महिला प्रेमी बेनी भाई साहब ,

घरई में घर वाली की खोपडी खा रये ।

कुवरमन के खाना को डब्बा ,

अब संगे नई जा रऔं ,

कुंवर सहाब को गोस माँस ,

बनाबे बारों कोनऊँ नई दिखा रऔं,

पशु विभाग में अब बा रोनक बची नईयाँ ।

सबरे निपटत जा रयें

गर्राबें बारें अब बचे नईयाँ,

एक शशीकांत सो दिखा रऔं ।

नेतागिरी करबें बारे, पाण्डेय, पटेल  से ,अब नई आ रये ।

कन्छेदी सो चौकीदार अब ढूँढे नई मिल रऔं

 के एस चन्देल



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