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देखते देखते जिन्दगी क्या हो गई

 देखते देखते जिन्दगी क्या हो गई 

मुंह पुपला गया ,

दाँत क्षड गये ,

कमर झुंक कमानी हो गई ।

चलना भी अब दुस्वार हो गया ,

देखते देखते जिन्दगी क्या हो गई ।

कभी कलशों से नहाया ,

लोटों की तरह ।

अब जिन्दगी बोंझ हो गई ।

चेहरा पोपला गया ,बाल क्षड गये ,

कमर क्षुक कमानी हो गई ,

कभी पढा था ,

आदमी की सफलता में

औरत का हाथ होता है ।

 इस रहस्य को समझतें समझतें

मै बूढा हो गया , तब समझ में आया ,

इस कामयाबी मे बूढे बाप की जावनी ,

उसके खून पसीने की महनत है ।

लोग तो बडी सहजता से कह देते है ।

आदमी की कामयाबी मे औंरत का हाथ होता है ,

अब उन्हे कौन समक्षायें ।

दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है।

जवानी छिन चुकी ,जिंदगी बोझ लगने लगी ।

अब और कुछ कह कर ,

 मुझे अपना हुक्का पानी ,थोडी बन्द कराना है ।

जिस हाल में हूँ , जींना तो अब मजबूरी है ।

चल रही है गाडी भरोसे भगवान के ,

देखते देखते जिन्दगी क्या हो गई ।

कृष्णभूषण सिंह चन्देल

M 9926436304

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